हिंदी में जानकारी

आर्थराइटिस क्या है?

आर्थराइटिस (संधिरोग) जोड़ों के सूजन की क्रोनिक (लम्बे समय से बनी हुई) स्थिति है. जोड़ वे स्थान हैं जहाँ दो
हड्डियाँ आपस में मिलती हैं जैसेकि कोहनी का जोड़, घुटने का जोड़ आदि. पचपन वर्ष से अधिक आयु के लोगों
में शारीरिक अक्षमता का यह प्रमुख कारण है. आर्थराइटिस के कई प्रकार होते हैं जैसेकि ओस्टियो आर्थराइटिस
(OA), रह्युमेटोइड आर्थराइटिस (संधिवात-RA) आदि.

ओस्टियो आर्थराइटिस(OA)

रह्युमेटोइड आर्थराइटिस (संधिवात-RA)

रोग अवधि

आर्थराइटिस से ठीक होना आर्थराइटिस के प्रकार पर निर्भर है. आमतौर पर यह कुछ महीनों से लेकर कुछ वर्षो के बीच हो सकता है. आर्थराइटिस का कोई उपचार नहीं है, औषधियां स्थिति के बढने को धीमा करने के लिए और जोड़ों के दर्द को कम करने के लिए दी जाती हैं आर्थराइटिस एक क्रोनिक(लम्बे समय तक बना रहने वाला) रोग है इसलिए लक्षण रहते और जाते हैं, या लम्बे समय तक बने रहते हैं.

Arthritis के कारण

  • आर्थराइटिस होने के कारण, आर्थराइटिस के प्रकार पर निर्भर करते है. कारणों में : चोट (ओस्टियोआर्थराइटिस
    में बदल सकती है)
  • मेटाबोलिक अनियमितता (जैसे कि गठिया और सूडोगाउट-एक प्रकार का गठिया)
  • अनुवांशिक कारण (Ex: HLA-B27 Gene)
  • किसी तरह का रोग या संक्रमण (बैक्टीरियल अथवा वायरल)
  • स्वयं को हानि करने वाला दिशाहीन (जैसा कि रह्युमेटोइड आर्थराइटिस में होता है)
  • मोटापा

अर्थराइटिस रोग के प्रकार और लक्षण

अर्थराइटिस जोड़ों में होने वाली एक बहुत ही आम बीमारी है। इस बीमारी में
जोड़ों में दर्द होता है और जोड़ों को घुमाने, मोड़ने, हिलाने और हरकत करने में
परेशानी होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एक सौ से भी अधिक किस्म के अर्थराइटिस होते हैं

अर्थराइटिस से व्यक्ति की रोज़मर्रा की जीवनशैली बुरी तरह प्रभावित होती है
। यह जीवन भर सताने वाली बीमारी होती है। बीमारी अधिक बढ़ने पर मरीज
के जोड़ों में असहनीय पीड़ा होती है और हाथ–पांव हरकत करना तक बंद कर
देते हैं।

अर्थराइटिस के प्रकार

रूमेटॉयड अर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis) :

यह इस बीमारी का बहुत अधिक पाया जाने वाला गंभीर रूप है। इस
अर्थराइटिस का समय पर प्रभावी उपचार करवाना आवश्‍यक होता है वरना
बीमारी बढ़ने पर एक साल के अन्दर ही शरीर के जोड़ों को काफी नुकसान हो
जाता है।

अर्थराइटिस रोग के प्रकार और लक्षण

अर्थराइटिस जोड़ों में होने वाली एक बहुत ही आम बीमारी है। इस बीमारी में
जोड़ों में दर्द होता है और जोड़ों को घुमाने, मोड़ने, हिलाने और हरकत करने में
परेशानी होती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि एक सौ से भी अधिक किस्म के अर्थराइटिस होते हैं।

अर्थराइटिस से व्यक्ति की रोज़मर्रा की जीवनशैली बुरी तरह प्रभावित होती है।

यह जीवन भर सताने वाली बीमारी होती है। बीमारी अधिक बढ़ने पर मरीज
के जोड़ों में असहनीय पीड़ा होती है और हाथ–पांव हरकत करना तक बंद कर
देते हैं।

अर्थराइटिस के प्रकार

रूमेटॉयड अर्थराइटिस (Rheumatoid Arthritis) :

यह इस बीमारी का बहुत अधिक पाया जाने वाला गंभीर रूप है। इस
अर्थराइटिस का समय पर प्रभावी उपचार करवाना आवश्‍यक होता है वरना
बीमारी बढ़ने पर एक साल के अन्दर ही शरीर के जोड़ों को काफी नुकसान हो
जाता है।

Rheumatoid Arthritis के लक्षण

  • सामान्य लक्षणों में: जोड़ों में और उनके आस पास सूजन
  • जोड़ों का दर्द, नाजुकता और जकड़न
  • जोड़ों को चलाने-घुमाने में कठिनाई
  • प्रभावित जोड़ के ऊपर त्वचा में गर्माहट और लालिमा
  • कमजोरी बने रहना
  • लगातार थकावट बने रहना
  • सुबह सुबह उठने पर अकड़न एवं जकड़न होना
  • लगातार हड्डी वाला बुखार बने रहना
  • जोड़ों का टेड़ापन

सोराइटिक अर्थराइटिस

अर्थराइटिस के दर्द का यह रूप सोराइसिस के साथ प्रकट होता है।

समय पर और सही इलाज न होने पर यह बीमारी काफी घातक और लाइलाज
हो जाती है।

सोराइटिक अर्थराइटिस

अर्थराइटिस के दर्द का यह रूप सोराइसिस के साथ प्रकट होता है।

समय पर और सही इलाज न होने पर यह बीमारी काफी घातक और लाइलाज
हो जाती है।

सोराइटिक अर्थराइटिस

अर्थराइटिस के दर्द का यह रूप सोराइसिस के साथ प्रकट होता है।

समय पर और सही इलाज न होने पर यह बीमारी काफी घातक और लाइलाज
हो जाती है।

सोराइटिक अर्थराइटिस

अर्थराइटिस के दर्द का यह रूप सोराइसिस के साथ प्रकट होता है।

समय पर और सही इलाज न होने पर यह बीमारी काफी घातक और लाइलाज
हो जाती है।

आंक्यलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस क्या है।

यह रोग मुख्यतया रीढ़ के जोड़ों(Spine) और Pelvis को
प्रभावित करता है।

यह सशक्त आनुवंशिक है (HLA-B27 Gene)। संपूर्ण
संयोजन के परिणामस्वरूप रीढ़ की हड्डी पूरी तरह से
अकड़ जाती है, जिसे बांस जैसी रीढ़ (बैंबू स्पाइन) का
नाम दिया गया है।

चिह्न और लक्षण

इस प्रकार का रोगी कोई युवक होता है।जिसे 15-45 वर्ष की उम्र में इस रोग के लक्षण सर्वप्रथम प्रकट होते हैं –
रीढ़ की हड्डी के निचले भाग या कभी-कभी समूची रीढ़ में दीर्घकालिक दर्द और जकड़न जो अकसर एक या
दूसरे नितंब या जांघ के पिछले हिस्से तक महसूस होती है।

स्त्रियों की अपेक्षा पुरूष 3:1 के अनुपात में प्रभावित होते हैं, और इस रोग के कारण पुरूषों को स्त्रियों की अपेक्षा
अधिक दर्द का सामना करना पड़ता है।

40% मामलों में आंक्यलोसिंग स्पॉन्डिलाइटिस में आँख का शोथ होता है जिससे आंखों का लाल हो जाना, दर्द
होना, अंधापन, आंखों के सामने धब्बों का दिखना होते हैं।

एक और सामान्य लक्षण है व्यापक थकान और कभी-कभी
Nausea का होना. Aortitis, Pneumonia, Infertility भी हो
सकता है।

Peripheral arthritis- 18 वर्ष से कम की उम्र में होने पर यह
रोग भुजा या पैरों के बड़े जोड़ों, विशेषकर घुटने में दर्द और
सूजन उत्पन्न कर सकता है।

Early morning stiffness- अकसर विश्राम की स्थिति में दर्द
अधिक तीव्र होता है और शारीरिक गतिविधि से कम होता है।

Investigations in Ankylosing Spondylitis

Radiology( X-Ray ,M.R.I )

ESR, CRP Elevated

Anemia

HL-B27

 

रिएक्टिव अर्थराइटिस (ReactiveArthritis)

शरीर में किसी तरह के संक्रमण फैलने के बाद रिएक्टिव अर्थराइटिस होने का
खतरा रहता है।

आंत या जेनिटोरिनैरी संक्रमण होने के बाद इसके होने की संभावना बढ़ जाती है।

इसमें सही इलाज काफी कारगर साबित होता है।

 

गाउट या गांठ

गांठ वाला अर्थराइटिस जोड़ों में मोनोसोडियम युरेट क्रिस्टल के होने पर होताहै।

भोजन में बदलाव और कुछ सहायक दवाओं के कुछ दिन तक सेवन करने से
यह बीमारी ठीक हो जाती है।

कैसे फैलता है गाउट (Stages of Gout)

गाउट(Gathiya) की शुरूआत सबसे पहले पंजों से होती है। अधिकांश रोगियों (लगभग 50%) में पैर के अंगूठे के
जोड़ (मेटाटारसल-फेलेंजियल जोड़) में तकलीफ होती है। तब इसे पोडोग्रा (Podagra) भी कहते हैं। कुछ समय
के बाद इसके कण शरीर के दूसरे जोड़ों तक फैल जाते हैं और यही दर्द बढ़ता हुआ कोहनी, घुटनें, हाथों की
उगुंलियों के जोड़ों और ऊतकों तक पहुँचता है।

Gout के लक्षण (Symptoms of Gout)

जोड़ों में रात को अचानक बहुत तेज दर्द होता है और सूजन आ जाती है। जोड़ लाल और गर्म महसूस होता है। साथ में बुखार और थकावट भी हो सकती है। गाउट का दौरा अमूमन 5-7 दिनों में ठीक हो जाता है। गाउट 75 प्रतिशत वंशानुगत होता है और यह ज्यादातर पुरूषों में पाया जाता है।

गाउट रोग के लक्षण (Risk Factors of Gout)

गाउट के रोगियों को रक्तचाप, डायबिटीज, मेटाबोलिक सिन्ड्रोम, वृक्क रोग और हृदय रोग का खतरा अधिक
रहता है। यदि उपचार नहीं किया जाये तो यह धीरे-धीरे दीर्घकालीन और स्थाई रोग बन जाता है।

जोड़ों की सतह क्षतिग्रस्त होने लगती है। अक्षमता और अपंगता बढ़ जाती है। साथ ही शरीर में कई जगह (जैसे
कान, कोहनी आदि) यूरिक एसिड जमा होने से दर्दहीन गांठें (Tophi) बन जाती हैं। यदि गुर्दे में पथरी बन जाये
तो स्थिति और जटिल हो जाती है। ऐसे में किडनी खराब (Kidney Failure) होने का खतरा बढ़ जाता है।

गाउट के लक्षण

  • कभी-कभी पैरों, सिर, टखने, घुटनों, जांघ और जोड़ों में दर्द के साथ-साथ सूजन आना
  • कभी-कभी बुखार की शिकायत
  • किसी अंग का शून्य हो जाना
  • खाया भोजन न पचना
  • जोड़ों को छूने तथा हिलाने में असहनीय दर्द होना
  • शरीर में खून की कमी होजाना आदि गठिया के मुख्य लक्षण हैं
  • शरीर में भारीपन

गाउट के कारण (Gout Causes)

गठिया रोग को जीवनशैली से जुड़ा रोग माना जाता है। अधिकांश मामलों में इसके मुख्य
कारण निम्न होते हैं:

जीवनशैली (Causes of Gout)

12% रोगियों में गाउट (Gathiya) का मुख्य कारण आहार को माना गया है। शराब , फ्रुक्टोज-
युक्त पेय, मांस, मछली के सेवन से गठिया का जोखिम बढ़ता है।

चयापचय में आई खराबी

मोटापा

 

कई रोग भी ऐसे होते हैं जिनकी वजह से गठिया रोग हो जाता है। यह रोग निम्न हैं:

  • गुर्दे की बीमारी
  • मेटाबोलिक सिंड्रोम
  • पॉलीसायथीमिया
  • लेड पॉयजनिंग
  • हीमोलिटिक एनीमिया
  • सोरायसिस और अंग प्रतिस्थापन (Organ Replacement)
  • मूत्रवर्धक दवाइयां (हाइड्रोक्लोरथायडाइड) का सेवन करने से भी गठिया हो सकता है।
  • नायसिन, एस्पिरिन, साइक्लोस्पोरिन और टेक्रोलिमस आदि दवाइयां भी गठिया रोग का कारण बन सकती हैं।

सिडडोगाउट

यह रूमेटायड और गाउट वाले अर्थराइटिस से मिलता जुलता है। सिडडोगाउट
में जोडों में दर्द कैल्शियम पाइरोफासफेट या हाइड्रोपेटाइट क्रिस्टल के जोड़ों में
जमा होने से होता है।

सिस्टेमिक लयूपस अर्थिमेटोसस

यह एक ऑटो इम्यून बीमारी है जो जोड़ों के अलावा शरीर के त्वचा और अन्य
अंगों को प्रभावित करती है। यह बच्चे पैदा करने वाली उम्र में महिलाओं को
होती है। वैसे तो यह जीवन के लिए खतरा पैदा करने वाली बीमारी है लेकिन
समय पर इसकी पहचान कर इसे नियंत्रण में रखा जा सकता है।

Treatment

गठिया का इलाज़ करने वाली दवाएं उसके प्रकार पे निर्भर करती हैं –

1. गठिया का दर्द काम करने वाली दवाएं- इनसे सिर्फ दर्द पर असर होता है पर सूजन पर कोई असर नहीं होता. Ex :Acetaminophen .

2. नॉन स्टेरॉइडल एंटी इंफ्लेमेटरी ड्रग्स (NSAIDS)- यह दवाइयां दर्द और सूजन दोनों काम करती हैं. जैसे की : Ibuprofen, Etoricoxib , etc .

3. कॉर्टिकॉस्टेरॉइड्स (Corticosteroids)- यह सूजन को कम करता है और प्रतिरक्षा प्रणाली पर दबाव डालता है . इसे ओरल रुट से लिया जाता है या कई बार इंजेक्शंस से भी दिया जाता है.

4. डिजीज मॉडीफीइंग एंटी रूमेटिक ड्रग्स (DMARDs)